ॐ भूर्भुवः॒ स्वः॒ तत्स॑वितुर्वरे॑ण्यम् भ॒र्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि। धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥
   
 
 
 
 
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त्यौहार
 
   
     
महालक्ष्मी आरती

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी l रहती हो स्थूलों में सूक्ष्मरूप लीन्ही ll धृ.ll
करविरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता l पुरहर वरदायि तू मुरहर प्रियकान्ता ll
धाता को जन्म दिया हरिनी नाभि में l शेष नहीं सक्षम वर्णन करने में ll १ ll
मातुलिंग गदा खेटक रविकिरणीं l झलझल सुवर्ण - वाती पियुषसरपानी ll
माणिकरसना सुरंगवसना मृगनयनी l शशिकरवदना राजस मदन की जननी ll २ ll
ताराशक्ति अगम्या शिवभजकां गौरी l सांख्य बोलते प्रकृती निर्गुण अविकारी ll
निगमागम का सार निजबीज गायत्री l निज धर्माचरण से प्रकटे पद्मवतीं ll ३ ll
सरिता तू अमृता तू अध को निवारी l दुर्घट असुर निहन्त्री भवभव निस्तारी ll
प्रणत जनों कि माया दूर करो माता l तव चिन्मय रूप भी देखते ही बनाया ll ४ ll
कर्मोक़ी मम रेखा दूषित जो होगी l विरंचिकृत जो विधान मैं हूं दुर्भागी
मिटा दीजिये सबको नयी लिखें रेखा l चरण धूलिसे निर्मल करो भाग्यरेखा ll ५ ll