जय ज्वाला रानी जय जवाला रानी |
प्रगती पर्वत उपर कलयुग कल्याणी ||
सती लो की जिन्हा मई गिर अधभूत तेज दिया |
नो जोयोटे फिर प्रगती शुभ इस्तान लिया||
काली लक्ष्मी सरस्वती जवाला ज्योति बड़ी |
हिंगलाज अंनपूर्णा चंदड़ी बीच खड़ी ||
बिन दीपक बिन बाटी पर्वत जोत जले |
जो पूजे साधक बन संकट आप तले ||
चंद्रहस राजा ने शुभ निर्माण किया |
गोरखनाथ गुरु को आदर मान दिया |
ज्योति सभी भुझहने अकबर आया था |
चमा मगकर तुमसे छात्रा चड़ाया था |
सैया भवन है सुंदर मान को आती भावे |
बार-बार दर्शन को है मा मान चहावे ||
पं-सुपारी पेड़ा दूध चड़े जवाला |
शक्ति पीठ को पूजे हाथ लिए माला ||
करे जागरण सेवक प्रेम लिए मान मई |
ऐसा ‘ओम’ आकर्षण तेरे दर्शन मई |